भारत-चीन बॉर्डर पर लापता दो सैनिकों में से एक की 17 दिनों बाद खबर, अरुणाचल प्रदेश में सेना ने दी नदी में बहने की सूचना

भारत-चीन बॉर्डर पर 17 दिनों से अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा से लापता चल रहे अंबीवाला के सैनिक नायक प्रकाश राणा के नदी के बहने की सूचना मिली है। जबकि, दूसरे सैनिक की अभी तक कोई खबर नहीं है। सेना की ओर से यह जानकारी सैनिक की पत्नी को दी गई। लेकिन सैनिक की पत्नी को इस पर विश्वास नहीं हो रहा है।

उनका कहना है कि उनको सच्चाई नहीं बताई जा रही है। नायक प्रकाश राणा मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ ब्लॉक के चिलोना गांव के रहने वाले हैं। अंबीवाला के सैनिक कॉलोनी निवासी नायक प्रकाश राणा 7वीं गढ़वाल राइफल्स में तैनात हैं। उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा से लगी ढोकला पोस्ट पर है।

29 मई को सेना से नायक प्रकाश राणा की पत्नी ममता देवी को सुबह आठ बजे फोन आया कि आपके पति एक दिन पहले लापता हो गए हैं। लापता कहां और कैसे हुए इस बारे में कुछ नहीं बताया। उनको सिर्फ यह बताया कि उनके साथ एक और सैनिक भी लापता है। ममता देवी ने बताया कि आठ दिन बाद फिर से उनका सेना से संपर्क हुआ तो उनको यह बताया गया कि उनके पति नदी में बह गए।

उनका कहना है कि उनको सच्चाई नहीं बताई जा रही है। नायक प्रकाश राणा मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ ब्लॉक के चिलोना गांव के रहने वाले हैं। अंबीवाला के सैनिक कॉलोनी निवासी नायक प्रकाश राणा 7वीं गढ़वाल राइफल्स में तैनात हैं। उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा से लगी ढोकला पोस्ट पर है।

29 मई को सेना से नायक प्रकाश राणा की पत्नी ममता देवी को सुबह आठ बजे फोन आया कि आपके पति एक दिन पहले लापता हो गए हैं। लापता कहां और कैसे हुए इस बारे में कुछ नहीं बताया। उनको सिर्फ यह बताया कि उनके साथ एक और सैनिक भी लापता है। ममता देवी ने बताया कि आठ दिन बाद फिर से उनका सेना से संपर्क हुआ तो उनको यह बताया गया कि उनके पति नदी में बह गए।

प्रशासन पर परिवार की सुध नहीं लेने का आरोप
अंबीवाला की क्षेत्र पंचायत सदस्य मंजू नेगी और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र नेगी ने भी नायक की खोजबीन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सैनिक को लापता हुए 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने सैनिक के परिवार की कोई सुध नहीं ली। उन्होंने सैनिक परिवार की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि लापता सैनिक की पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे परेशान हैं। ऐसे समय में प्रशासन को उनका सहयोग करना चाहिए, लेकिन सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर के अलावा अभी तक उनके घर कोई नहीं आया।

सैनिकों के विषय में सरकार बेहद गंभीर है। मैं स्वय भी उनकी यूनिट, आर्मी हेडक्वार्टर और केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क में हूं। सभी स्तरों पर संवेदनशीलता के साथ प्रयास जारी हैं।

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