बादल छाने से समूचे उत्तराखंड में बढ़ी ठिठुरन, इन चार पहाड़ी जिलों में बदल सकता है मौसम

 पहाड़ों से मैदान तक दिनभर बादल छाये रहने से समूचा उत्तराखंड में ठिठुरन बढ़ गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि राज्य में मौसम के करवट बदलने की संभावना है। चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ व उत्तरकाशी की ऊंची चोटियों में मंगलवार को हल्की बर्फबारी व निचले इलाकों में वर्षा होने की संभावना है।

सोमवार को उत्तराखंड में दिनभर हल्की धूप रही। सोमवार को प्रदेश के दो शहरों का न्यूनतम तापमान टिहरी के रानीचौंरी में 2.8 व पिथौरागढ़ में 3.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, वहीं प्रदेश में अधिकतम तापमान देहरादून शहर में 22.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

ऊधमिसंहनगर के पंतनगर से इंडिगो कंपनी की पंतनगर-दिल्ली हवाई सेवा कोहरे के चलते 10वें दिन भी निरस्त रही। पंतनगर एयरपोर्ट के निदेशक सुमित सक्सेना ने बताया कि अधिक कोहरा होने के कारण दृश्यता समस्या बनी है। राज्य में अन्य हवाई और रेल सेवाएं नियमित हैं।

सूर्य देव व बादलों में लुका छुपी, कड़ाके की ठंड ने कंपकपाया

चकराता में सोमवार को पूरे दिन सूर्यदेव व बादलों की लुकाछुपी चली। जिसके चलते कड़ाके की ठंड ने सभी को कंपा दिया। ऊंची पहाड़ियों पर पारा माइनस में पहुंचने से पेयजल लाइन व पानी के जमने का सिलसिला जारी है।

सांझ होने से पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग घरों के अंदर जा रहे हैं। सूखी ठंड व पाले के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों का आवागमन मुश्किल होता जा रहा है। चकराता में बाजार देर से खुल रहे हैं और शाम को जल्दी बंद होने से कुछ घंटे ही कारोबार हो रहा है।

सोमवार को मौसम का मिजाज बदला बदला नजर आया। एक बार तो लगा वर्षा होगी, लेकिन पूरे दिन सूर्यदेव व बादलों के बीच लुकाछिपी का खेल चला। वर्षा न होने से किसानों व बागवानों को निराशा हाथ लगी। पूरे दिन कभी गुनगुनी धूप तो कभी आसमान पर बादल मंडराते रहे, जिससे क्षेत्र में तापमान में गिरावट आई और भयानक ठंड ने लोगों को कांपने पर मजबूर कर दिया।

बदले मौसम के मिजाज से चकराता क्षेत्र व आसपास के इलाकों में पारा माइनस में पहुंचा हुआ है। सूखी ठंड व सड़कों पर पाला जमने से पर्यटकों ने भी पर्यटन स्थल चकराता, लोखंडी, रामताल गार्डन, लोहारी आदि क्षेत्रों से दूरी बना ली है।

बाजार में लोग दिनभर अलाव तापते नजर आ रहे हैं। घरों में अंगीठी का सहारा लिया जा रहा है। स्थानीय बुजुर्ग नारायण सिंह राणा, नवीन जैन, राजेंद्र अरोड़ा, राजेंद्र चौहान, अशोक कुमार चौरसिया आदि का कहना है कि इस वर्ष सूखी ठंड अधिक है, पाला फसलों व बागवानी को नुकसान पहुंचा रहा है। वर्षा व बर्फबारी हो जाती तो चुभन वाली ठंड समाप्त हो जाती।

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