कर्तव्य पथ पर दिखेगी उत्तराखंड की ‘मानसखंड’ पर आधारित झांकी

आगामी गणतंत्र दिवस परेड के लिए उत्तराखंड की झांकी का अंतिम चयन हो गया है। सूचना विभाग की ओर से मानसखंड पर आधारित झांकी प्रस्तावित की गई थी। केंद्र सरकार की ओर से अंतिम रूप से इस बार नई दिल्ली कर्त्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में ‘मानसखंड’ की झांकी का प्रदर्शन करने की मंजूरी दी गई है।

सूचना विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि झांकी के अग्र और मध्य भाग में कॉर्बेट नेशनल पार्क में विचरण करते हुए हिरन, बारहसिंघा, घुरल, मोर और उत्तराखंड में पाई जाने वाली विभिन्न पक्षियों की झांकी प्रदर्शित की गई है जबकि पृष्ठ भाग में प्रसिद्ध जागेश्वर मंदिर समूह और देवदार के वृक्षों को दिखाया जाएगा।

इसके साथ ही साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कला ‘ऐपण’ का भी झांकी के मॉडल में समावेश किया गया है। झांकी के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए छोलिया नृत्य का दल सम्मिलित होगा। झांकी का थीम सांग उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित होगा। बता दें कि केदारनाथ व बदरीनाथ की तर्ज पर कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है।

27 में से 16 राज्यों की झांकी का चयन 

गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए 27 राज्यों ने अपने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे थे। इनमें 16 राज्यों का ही अंतिम चयन हुआ है। राष्ट्रीय समारोह के नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक केएस चौहान की ओर से झांकी का डिजाइन, थ्री-डी मॉडल और संगीत के संदर्भ में रक्षा मंत्रालय के अधीन गठित विशेषज्ञ समिति के सम्मुख सात बार प्रस्तुतीकरण के बाद उत्तराखंड की झांकी का अंतिम चयन हुआ है।

अब तक 13 झांकियों का हो चुका है प्रदर्शन 
उत्तराखंड की ओर से अभी तक विगत वर्षों में 13 झांकियों का प्रदर्शन कर्त्तव्य पथ पर किया गया है। इनमें वर्ष 2003 में फुलदेई, वर्ष 2005 में नंदा राजजात, वर्ष 2006 में फूलों की घाटी, वर्ष 2007 में कार्बेट नेशनल पार्क, वर्ष 2009 में साहसिक पर्यटन, वर्ष 2010 में कुंभ मेला हरिद्वार, वर्ष 2014 में जड़ीबूटी, वर्ष 2015 में केदारनाथ, वर्ष 2016 में रम्माण, वर्ष 2019 में अनाशक्ति आश्रम, वर्ष 2021 में केदारखंड और वर्ष 2022 में प्रगति की ओर बढ़ता उत्तराखंड सम्मिलित हैं।

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