लूसेंट इंटरनेशनल स्कूल मामला: सीबीएसई दून ने पहले भी की थी जांच और कार्रवाई की सिफारिश

लूसेंट इंटरनेशनल स्कूल में दाखिलों का फर्जीवाड़ा काफी पुराना है। स्कूल ने 11वीं में जिन छात्रों को पंजीकृत कराया, 12वीं के बोर्ड परीक्षा फॉर्म में उनमें से 86 के नाम बदल दिए। पूर्व अधिकारियों ने मामले की जांच कर सीबीएसई दिल्ली से इसकी जांच की सिफारिश की थी।

बाल संरक्षण आयोग ने बुधवार को लूसेंट इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। 86 छात्रों की परीक्षाएं ओपन बोर्ड से कराने को कहा था। यह छात्र अब सीबीएसई की परीक्षा नहीं दे पाएंगे। दरअसल, लूसेंट स्कूल ने अपनी 12वीं के 261 छात्रों को शामिल होने की सूचना दी थी। इनमें से 245 को ही परीक्षा सूची में शामिल किया।

बोर्ड ने सभी छात्रों की जानकारी ऑनलाइन करने को कहा। तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी जेपी चतुर्वेदी और केवि आईएमए के प्रधानाचार्य मामचंद ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि स्कूल ने 12वीं की जो सूची भेजी है उसमें 86 छात्रों का डाटा बदल दिया गया। उन्होंने सीबीएसई दिल्ली को यह प्रस्ताव भेजा था कि स्कूल की जांच की जाए।

इस सत्र से 11वीं के एक सेक्शन के संचालन की अनुमति दी जाए। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व की समिति के निरीक्षण में भी यह तथ्य स्पष्ट हो गया था कि जिन छात्रों के नाम बदले गए हैं वे नियमानुसार बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकते हैं। उधर, बुधवार को भी सीबीएसई देहरादून के क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह ने बाल आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि बोर्ड के नियमों के हिसाब से 86 छात्र परीक्षा के लिए अयोग्य हैं।

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