फोरेंसिक टीम को भी घटनास्थल से 9 एमएम के तीन सरकारी पिस्टल और खोखे मिले हैं। मौके पर किसी और असलहे के खोखे नहीं पाए गए। ऐसे में गुरजीत के परिजनों के आरोप और भी पुख्ता हो जाते हैं। बुधवार देर रात गुरजीत के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया, लेकिन शरीर से कोई बुलेट नहीं मिला।
ऐसा होता है
आमतौर पर 30 मीटर दूरी से 9 एमएम पिस्टल से चली गोली शरीर से बाहर नहीं निकल पाती। अगर पिस्टल से पांच मीटर से कम दूरी से फायर किया जाता है तो गोली शरीर से आर-पार हो जाती है। ऐसी स्थिति में गोली लगने वाले स्थान पर कालापन आ जाएगा।
मामला उलझा
गुरजीत के शरीर में बुलेट नहीं मिलने से मामला उलझ गया है। अगर कम दूरी से गोली चली है तो घाव वाले स्थान पर ब्लैकनेस क्यों नहीं है। इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलेगा कि गोली के छेद का बैलेस्टिक व्यास कितना है।इसके साथ फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट गोली चलने की दूरी तय करेगी। पुलिस ने मौके से बरामद पिस्टलों से भी फिंगरप्रिंट लिए हैं। डीएनए टेस्ट के लिए गुरजीत के बालों का सैंपल भी एकत्र किया गया है।
ऐसे हटेगा पर्दा
वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ ही गोली का बैलेस्टिक व्यास इस राज से पर्दा हटाएगा कि गुरजीत का कातिल कौन है। इस हत्याकांड की विवेचना काशीपुर कोतवाल मनोज रतूड़ी को सौंपी गई है।