इंडिया गेट पर ही नहीं, 300 स्थानों पर फहराया गया था तिरंगा

15 अगस्त 1947 को देश जब आजाद हुआ पूरी दिल्ली जश्न में डूब गई थी। राजधानी में केवल इंडिया गेट पर ही नहीं, बल्कि लगभग 300 स्थानों पर तिरंगा फहराया गया था। अलग-अलग लेखकों ने अपनी पुस्तकों में इसका जिक्र किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) सहित राजधानी के तमाम शैक्षिणक संस्थानों में न केवल मिठाइयां बांटी गईं, बल्कि उनके प्रिंसिपल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ध्वजारोहण किया। इस दिन अवकाश की घोषणा थी, लेकिन लोगों का उत्साह इतना था कि वह हर उस जगह पर जश्न मनाने जाते जहां वह जा सकते थे। रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक भारत गांधी के बाद में इन दिन का विशेष वर्णन किया है। वह लिखते हैं कि ऐसा लगता है कि देश छोड़कर जा रहे ब्रिटिश शासकों की तरह ही भारतीय भी भव्य समारोहों में खासी दिलचस्पी लेते थे। पूरी दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में सरकार और आमलोगों ने काफी उत्साह के साथ आजादी का स्वागत किया। सिर्फ दिल्ली में ही तीन सौ स्थानों से ध्वजारोहण की खबरें आईं।
आधी रात से ही शुरू हो गया था जश्न : 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण के दिन के रूप में चुना गया था। इस दिन का चुनाव वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने किया क्योंकि इस दिन द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों के समक्ष जापानी सेना के आत्मसमर्पण की दूसरी बरसी थी।
माउंटबेटन इसे अपने लिए भी यादगार बनाना चाहते थे और सत्ता के नए दावेदार अब और देरी नहीं करना चाहते थे। वे अगले साल 1948 की 26 जनवरी तक का इंतजार नहीं करना चाहते थे। भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह का औपचारिक समारोह आधी रात से थोड़ा ही पहले शुरू हुआ। ज्योतिषियों ने कहा था कि 15 अगस्त का दिन आजादी हासिल करने के लिए शुभ दिन नहीं है। इस तरह ये तय हुआ कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को 14 अगस्त को ही शुरू कर दिया जाए, जिसके तहत संविधान सभा की एक विशेष बैठक हो। संविधान सभा, भारतीय प्रतिनिधियों की एक सभा थी जो नया संविधान बनाने का काम कर रही थी।

रामचंद्र गुहा लिखते हैं यह समारोह एक ऊंचे गुंबद वाले सभाकक्ष में हुआ जो पूर्ववर्ती ब्रिटिश राज के दौरान विधान परिषद के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता था। उस कक्ष में शानदार प्रकाश की व्यवस्था की गई और जगह-जगह झंडे लगाए गए। कुछ झंडों को उन तस्वीरों के फ्रेम के भीतर भी रख दिया गया जिनमें पिछले सप्ताह तक ब्रिटिश वायसराय की तस्वीरें हुआ करती थीं।

न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वॉयर जैसा नजारा

काउंसिल हॉल के बाहर सड़कों पर लोग जश्न में डूबे हुए थे। एक अमेरिकन पत्रकार ने लिखा कि सड़कों पर लोग खुशी से चिल्ला रहे थे। हिंदू, मुसलमान और सिख, सभी आजादी का जश्न साथ-साथ मना रहे थे। ऐसा लग रहा था कि यह नए साल की पूर्वसंध्या पर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वॉयर का नजारा हो। उत्साहित भीड़ नेहरू को देखना चाहती थी।

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