हराकर जीतने वाले सियासी बादशाह बने धामी, लोग कहते हैं- फ्लॉवर नहीं फायर भी हैं पुष्कर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपने जन्मदिन को संकल्प दिवस के रूप में मनाने की सोची और इसी के साथ प्रदेशवासियों से मिले प्यार के लिए आभार व्यक्त किया। जन्मदिन के अवसर पर गृह अमित शाह सहित तमाम राजनेताओं और सितारों की ओर से उन्हें बधाई संदेश दिए जा रहे हैं। आज जानिए उनके बारे में खास बातें..

शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टपकेश्वर महादेव पहुंचकर पहले महादेव का आशीर्वाद लिया। अपने परिवार के साथ सीएम यहां पहुंचे और महादेव का जलाभिषेक किया। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक महिला मोर्चा की महिलाएं धार्मिक स्थलों, गंगा निकारे व शिवालयों में 48-48 दीपक जलाकर मुख्यमंत्री की दीर्घायु की कामना की जा रही है। सुबह छह बजे संकल्प दौड़ का आयोजन किया गया।

पुष्कर सिंह धामी का जन्म जनपद पिथौरागढ़ की ग्राम सभा टुण्डी, तहसील डीडीहाट में हुआ है। वह एक साधारण परिवार से आते हैं। उनकी शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई है।
हारकर भी जीते धामी
खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद भी उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने रहे। उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया और इसी के साथ उत्तराखंड में एक नया इतिहास जुड़ा। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने पूरे उत्तराखंड में अपनी अलग पहचान बना ली। देवभूमि के युवाओं के बीच उनकी काफी लोकप्रियता बढ़ गई। केंद्रीय नेताओं की परिक्रमा के साथ ही दिल्ली दरबार में बाकायदा लॉबिंग शुरू हो गई थी, लेकिन कुर्सी के दावेदार बड़े-बड़े दिग्गजों को चित कर सीएम धामी मोदी-शाह की आंखों का तारा बनने में कामयाब रहे थे।

राजनीतिक सफर

1994-1995 में विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ली
2001 तत्कालीन मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के ओएसडी भी रहे
2005 -भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष
2010-12 तक शहरी अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष
2012-  विधायक बने
2013 -भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष
2017- दूसरी बार विधायक बने
2021- मुख्यमंत्रीपुष्कर फ्लॉवर भी और फायर भी। चुनाव प्रचार के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बयान के बाद सीएम धामी ने खूब सुर्खियां बटोरीं।भाजपा ने चुनाव हारने के बावजूद धामी को फिर कमान सौंपी। और इस तरह वह हारकर भी बाजीगर बन गए।

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