विधानसभा चुनाव में बगावत से सख्ती से निपट रही कांग्रेस, बागियों-समर्थकों को किया बाहर

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस बार बगावत से सख्ती से निपट रही है। बागी होकर चुनाव लड़ने वालों को तो पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अब बागियों का साथ देने वालों के खिलाफ भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। टिकट के दावेदार रहे सभी नेताओं के मूवमेंट और सक्रियता पर भी नजर रखी जा रही है। कहीं भी पार्टी विरोधी गतिविधि नजर आने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

पार्टी की जिला कार्यकारिणी और विधानसभावार नियुक्त किए गए पर्यवेक्षकों पर बगावत थामने का जिम्मा है। इसके साथ ही पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में सहयोग न करने वालों की रिपोर्ट भी ली जा रही है। उनकी संस्तुति पर बगावत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। कार्रवाई की जद में छोटे से लेकर बड़े नेता भी आ रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्रियों समेत पूर्व विधायकों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

रुद्रप्रयाग में पूर्व कैबिनेट मंत्री मातवर सिंह कंडारी, पूर्व प्रत्याशी और जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा, संगठन पदाधिकारी अंकुर रौथाण समेत कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। गंगोलीहाट में पूर्व विधायक नारायण राम आर्य और हरिद्वार में पूर्व विधायक तस्लीम अहमद को भी पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।

कांग्रेस ने बगावत और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर चुनाव से पहले ही अपना रुख सख्त कर लिया था। इसी सख्ती के चलते पहले पूर्व पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से सभी जिम्मेदारियां वापस ले ली गई थी। बाद में उनकी भाजपा से बढ़ती नजदीकी को भांपते हुए पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य को भी पार्टी से बाहर करने में देरी नहीं की गई। यही वजह रही, जो इस बार चुनाव में कांग्रेस बगावत को थामने में काफी हद तक कामयाब रही। यमुनोत्री, रुद्रप्रयाग, रामनगर को छोड़ दें, तो अधिकतर सीटों पर बगावत की स्थिति नहीं है। जबकि पहले अधिकतर सीटों पर कांग्रेस को बगावत का सामना करना पड़ता था।

कांग्रेस के चार और नेता पार्टी से छह साल के लिए बाहर
कांग्रेस ने पार्टी लाइन से हटकर काम करने वालों के खिलाफ बुधवार को भी कार्रवाई की। यमुनोत्री विधानसभा सीट पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष समेत चार लोगों को पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव संगठन मथुरादत्त जोशी ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के निर्देश पर यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र से पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य हंसपाल बिष्ट, सुनील वरूण, वरदेव सिंह, उर्वीदत्त गुरूली को पार्टी विरोधी गतिविधियों एवं अनुशासनहीनता के चलते तत्काल प्रभाव से पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।

मथुरादत्त जोशी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक अनुशासित संगठन है। इसमें यदि अनुशासनहीनता होती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी पार्टी अनुशासन की लाईन पार करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। कांग्रेस पार्टी ने सभी जिला एवं शहर अध्यक्षों को भी निर्देश दिये हैं कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाए।

चुनावी मैनेजमेंट ने रोकी बगावत
कांग्रेस का चुनावी मैनेजमेंट इस बार बेहतर रहा। यही वजह है जो इस बार बागियों की संख्या कम है। सहसपुर जैसी सीट, जहां तीन से चार बागी हमेशा चुनाव लड़ते थे। इस बार यहां एक भी बागी नहीं है। रायपुर सीट पर भी आधा दर्जन के करीब दावेदार थे, लेकिन यहां भी एक बागी चुनाव मैदान में नहीं है।

विधानसभा चुनाव में सभी लोग पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जो भी काम कर रहा है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

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