अमित शाह के कर्नाटक पहुंचते ही भाजपा को बड़ी सफलता, JDS के बड़े नेता को तोड़ा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कर्नाटक पहुंचते ही बीजेपी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधान परिषद के मौजूदा अध्यक्ष बसवराज होराती मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। होराती बेंगलुरु में अमित शाह, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए।

2023 विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल के कद्दावर नेता बसवराज होराती का बीजेपी से जुड़ना बड़ा संकेत है। यह न सिर्फ बीजेपी को चुनावी फायदा पहुंचा सकता है बल्कि ऊपरी सदन में भी भाजपा को बढ़त दे सकता है। क्योंकि इससे पहले दूसरों पर निर्भर रहे बिना विवादास्पद बिलों को पारित करने में मदद करने के लिए बहुमत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। बीजेपी को उच्च सदन में संख्याबल की आवश्यकता है क्योंकि उसके पास अभी भी बहुमत नहीं है और धर्मांतरण विरोधी जैसे प्रमुख विधेयक, जो निचले सदन में पारित हो चुके हैं, परिषद में अटके हुए हैं।

जनता दल में अभी और टूट के आसार
बसवराज होराती के जाने से जनता दल के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि, कम से कम छह विधायकों के पार्टी छोड़ने की संभावना है। ऐसा होने से बीजेपी को पुराने मैसूर क्षेत्र में वोटों के बंटवारे या संगठन की ओर समर्थन के बदलाव से फायदा होगा जैसा कि 2019 लोकसभा चुनाव देखा गया था।

गौरतलब है कि राज्य में कांग्रेस और जनता दल (एस) ने 2019 में लोकसभा चुनावों में अपने राज्य-स्तरीय गठबंधन के विस्तार करने का प्रयास किया था, जो उनके लिए फायदा नहीं पहुंचा सका, क्योंकि 2019 लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 में से सिर्फ एक सीट पर सिमट गए थे।

जनता दल पर परिवारवाद के आरोप
जीटी देवेगौड़ा, श्रीनिवास गौड़ा, गुब्बी श्रीनिवास और कई अन्य जैसे नेता जद (एस) के पहले परिवार के साथ मतभेदों को लेकर जद (एस) से दूर हो चुके हैं। जद (एस) पर लंबे समय से केवल अपने परिवार के सदस्यों जैसे पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और एचडी रेवन्ना के साथ-साथ अपने रिश्तेदारों और बच्चों के हित में काम करने के आरोप लगते रहे हैं। कुमारस्वामी चन्नापटना से विधायक हैं, उनकी पत्नी अनीता कुमारस्वामी रामनगर से विधायक हैं। वहीं, बेटा निखिल 2019 में मांड्या से लोकसभा चुनाव हार गए थे। रेवन्ना पूर्व मंत्री और होलेनरसीपुरा से विधायक हैं, एक बेटा हसन से सांसद है, दूसरा उसी जिले से एमएलसी है और मां भवानी जिला पंचायत अध्यक्ष थीं।

ऐसी अटकलें हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग चाहता है कि भवानी 2023 का विधानसभा चुनाव लड़े। देवेगौड़ा की एक और बेटी भी अगले चुनाव में टिकट की दौड़ में है और उनके ससुर डीसी थमन्ना मद्दुर से विधायक हैं।

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